तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में स्थित वेदगिरीश्वर मंदिर

चेंगलपट्टू का वेदगिरीश्वर मंदिर : 4 वेद पर्वत और 2 शाकाहारी गिद्ध जिन्होंने सदियों तक पुजारी के हाथों ही ग्रहण किया शाकाहारी प्रसाद

भारत के दक्षिणी भाग में स्थित तमिलनाडु एक ऐसा प्रदेश हैं जहाँ हजारों की संख्या में हिन्दू मंदिर हैं। इनमें से अधिकांश मंदिर हजारों वर्ष प्राचीन हैं एवं इनका इतिहास भी सनातन से जुड़ा हुआ है। ऐसा ही एक मंदिर चेंगलपट्टू जिले के तिरुकलुकुन्द्रम में है, भगवान शिव एवं माता पार्वती को समर्पित वेदगिरीश्वर मंदिर। ‘पक्षी तीर्थम’ के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर की एक अनोखी विशेषता रही। यहाँ सदियों से दो ऐसे गिद्ध आया करते थे जो पूर्णतः शाकाहारी थे एवं चावल, गेहूँ, घी और शक्कर से बना प्रसाद मंदिर के पुजारी के हाथों से ही ग्रहण करते थे।

4 वेद, 4 पर्वत और वेदगिरीश्वर स्वामी

सनातन काल से ही इस सम्पूर्ण क्षेत्र का पौराणिक महत्व है। परम तेजस्वी भारद्वाज ऋषि ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। उद्देश्य था लंबी आयु का वरदान प्राप्त करना जिससे सभी वेदों का सम्पूर्ण ज्ञान अर्जित कर सकें। भगवान शिव, भारद्वाज ऋषि की तपस्या से प्रसन्न तो हुए किन्तु उन्होंने एक शर्त रखी। महादेव ने चारों वेदों के प्रतीकों के रूप में चार पर्वतों का निर्माण किया एवं एक मुट्ठी मिट्टी लेकर भारद्वाज ऋषि से बोले कि इन पर्वतों के सम्मुख जितनी यह मिट्टी है, वेदों के विषय में भारद्वाज ऋषि मात्र उतना ही सीख पाएंगे।

तत्पश्चात कालांतर में पल्लव वंश के शासकों के द्वारा उसी स्थान पर भगवान शिव एवं माता पार्वती के मंदिरों का निर्माण कराया गया जहाँ वेद रूपी चार पर्वत स्थित हैं। वेदगिरीश्वर का अर्थ है, वेद पर्वतों के स्वामी। इस पक्षी तीर्थम परिसर में स्थित मंदिरों का निर्माण द्रविड़ वास्तुशैली में हुआ है।

ताझा कोइल एवं मलई कोइल, परिसर में स्थित दो महान मंदिर

तमिलनाडु के वेदगिरीश्वर मंदिर परिसर अथवा पक्षी तीर्थम परिसर में भगवान शिव एवं माता पार्वती के अलग-अलग मंदिर हैं। पहाड़ी की तलहटी में स्थित मंदिर में माता पार्वती, त्रिपुरसुंदरी के रूप में भगवान भक्तवचेलश्वर के साथ विराजमान हैं। माता पार्वती के इस मंदिर को ताझा कोइल के नाम से जाना जाता है।

वहीं दूसरी ओर पहाड़ी के शिखर पर स्थित है 4 गोपुरम वाला मलई कोइल जहाँ विराजमान हैं वेदगिरीश्वर स्वामी, माता सोक्का नायगी के साथ। भगवान वेदगिरीश्वर के इस मंदिर को भारत के दक्षिणी भाग के कैलाश एवं कझुगु कोइल के नाम से भी जाना जाता है।

गंगा स्नान करके वेदगिरीश्वर मंदिर पहुँचने वाले दो शाकाहारी गिद्ध

भूतकाल में 8 ऋषियों को भगवान शिव ने गिद्ध में बदल जाने का श्राप दिया किन्तु ऋषियों के निवेदन पर भगवान शिव ने उन्हें यह आशीर्वाद भी दिया कि प्रत्येक युग में दो ऋषि श्राप से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करेंगे। सतयुग, त्रेतायुग एवं द्वापरयुग में 6 ऋषियों ने भगवान शिव के आशीर्वाद के चलते मोक्ष को प्राप्त किया। इसी क्रम में 2 गिद्धरूपी ऋषि कलियुग में भगवान शिव के दर्शन करने वेदगिरीश्वर मंदिर में आते रहे। ऐसा माना जाता था कि यदि उनके दर्शन करने वालों में कोई पापी व्यक्ति होता तो दोनों गिद्ध नहीं आते थे।

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वेदगिरीश्वर मंदिर में प्रतिदिन भगवान शिव का दर्शन करने वाले इन गिद्धों की यात्रा आसान नहीं होती थी। सबसे पहले दोनों गिद्ध वाराणसी में गंगा स्नान करते थे, तत्पश्चात दोनों तिरुकलुकुन्द्रम पहुँचकर वेदगिरीश्वर स्वामी के दर्शन करते। यही वह समय होता था जब दोनों गिद्ध चावल, गेहूँ, घी और शक्कर से बना प्रसाद मंदिर के पुजारी के हाथों से ही ग्रहण करते थे। सामान्यतः गिद्ध मृत जानवरों के अवशेषों पर निर्भर रहते हैं किन्तु यह दोनों गिद्ध पूर्णतः शाकाहारी थे।

मंदिर के पुजारी के हाथ से प्रसाद ग्रहण करते गिद्ध (Photo : Edgar Thurston)

वेदगिरीश्वर मंदिर में भगवान शिव का दर्शन करने के पश्चात दोनों गिद्ध रामेश्वरम पहुँचते एवं वहाँ भगवान रामनाथस्वामी का दर्शन करने के पश्चात रात्रि विश्राम चिदंबरम मंदिर में करते। तत्पश्चात दोनों गिद्ध गंगा स्नान करने वाराणसी पहुँचते एवं उनकी यात्रा का वही क्रम चलता रहता। अगर गूगल मैप के हिसाब से एक सामान्य गणना करें तो इन दोनों गिद्धों द्वारा प्रतिदिन लगभग 4,870 किमी की दूरी तय की जाती थी। 1998 तक दोनों गिद्ध मंदिर में दिखाई दिए किन्तु उसके पश्चात आज तक उनके दर्शन नहीं हुए। संभावना जताई जाती है कि या तो दोनों गिद्ध रूपी ऋषियों को मोक्ष की प्राप्ति हो गई अथवा अब ऐसा कोई व्यक्ति शेष नहीं रहा जो पापी न हो।

वेदगिरीश्वर मंदिर तक पहुँचने के साधन

तमिलनाडु का चेंगलपट्टू जिला, राजधानी चेन्नई एवं अन्य बड़े शहरों से सड़क मार्ग से सरलता से जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन की बसों का उपयोग करके चेंगलपट्टू पहुँचा जा सकता है। चेंगलपट्टू का रेलमार्ग के माध्यम से भी भारत के दक्षिणी भाग में स्थित कई नगरों से सुगम संपर्क है। चेंगलपट्टू रेलवे स्टेशन, मंदिर से लगभग 12 किमी की दूरी पर है। इसके अतिरिक्त चेन्नई जंक्शन से मंदिर की दूरी लगभग 74 किमी है एवं चेन्नई से मंदिर तक पहुँचने के लिए यातायात के साधन सरलता से उपलब्ध रहते हैं। चेंगलपट्टू एवं वेदगिरीश्वर मंदिर का निकटतम हवाईअड्डा चेन्नई में स्थित है जो यहाँ से लगभग 55 किमी दूर है।