पिछले कुछ दिनों में भारत एवं विश्व में कोरोना वायरस संक्रमण का तुलनात्मक अध्ययन

Covid-19 : पिछले 7 दिन, USA में 6,55,689 तो UK में 2,90,242 और भारत में मात्र 70,079 केस लेकिन पत्रकारिता के गिद्ध नदारद

आपको स्मरण होगा कि जब भारत में Covid-19 संक्रमण की दूसरी लहर ने भयानक रूप दिखाया था तब संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही थी एवं मृत्यु के आँकड़े भी अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ रहे थे। यह समय था जब पश्चिमी मीडिया ने अपनी गिद्ध पत्रकारिता का ‘अभूतपूर्व’ प्रदर्शन किया था। भारत में जलती हुई चिताओं के छायाचित्र (Photos) हजारों डॉलर में बेचे गए। संपादकीय लिखे गए, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया गया एवं कोरोनावायरस से युद्धरत भारत के प्रयासों को कलंकित किया गया।

किन्तु अब कहाँ है यह गिद्ध मीडिया? पिछले 24 घंटों में भारत में संक्रमण के मात्र 7,579 नए मामले आए हैं जो कि पिछले 543 दिनों में न्यूनतम हैं जबकि ‘सो कॉल्ड’ विकसित पश्चिमी देशों की बात करें तो इसी समयावधि में वहाँ संक्रमण का विकराल रूप बना हुआ है। जहाँ भारत में मात्र साढ़े सात हजार मामले सामने आए वहीं अमेरिका में 74,156, ब्रिटेन में 44,917, जर्मनी में 40,489 एवं तुर्की में 24,856 नए संक्रमण के मामले देखने को मिले। यहाँ तक कि पोलैंड, बेल्जियम, नीदरलैंड, ऑस्ट्रिया एवं हंगरी जैसे छोटे देशों में नए संक्रमित मरीजों की संख्या भारत से कहीं अधिक है। ये ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या भारत के कुछ राज्यों से भी कम है और ‘विकास’ के पैमानों पर इनकी सराहना की जाती रही है। रूस में जहाँ संक्रमण के 35,681 नए मामले देखने को मिले वहीं वहाँ संक्रमण के चलते हुई मौतों की संख्या भी 1,241 रही।

अब बात करते हैं Covid-19 संक्रमण के पिछले 7 दिनों की समयावधि की। बीते 7 दिनों में भारत में कोरोनावायरस संक्रमण के 70,079 नए मामले सामने आए। नए संक्रमितों के आधार पर वरीयता क्रम में भारत विश्व भर में 13वें स्थान पर है। वरीयता क्रम में भारत से ऊपर जो 12 देश हैं उनमें से 11 देशों में पिछले 7 दिनों में मिलने वाले नए संक्रमितों की संख्या 01 लाख से ऊपर ही है। ये 12 देश हैं, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, रूस, तुर्की, नीदरलैंड, पोलैंड, फ्रांस, यूक्रेन, चेक रिपब्लिक, बेल्जियम एवं ऑस्ट्रिया। पिछले 7 दिनों के दौरान अमेरिका में मिलने वाले नए संक्रमित मरीजों की संख्या 6,55,689 रही जो कि भारत का लगभग 10 गुना है। इसके अतिरिक्त जर्मनी एवं ब्रिटेन में इसी समयावधि में क्रमशः 3,49,762 एवं 2,90,242 नए मामले सामने आए। आप ही तुलना कीजिए कि कहाँ भारत के सत्तर हजार संक्रमण मामले एवं कहाँ इन विकसित देशों के लाखों की संख्या में संक्रमित होने वाले नए मरीज।

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अब आप तुलना कीजिए कि क्या आपको कहीं भी भारत की सराहना करते हुए अथवा इन पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए कोई संपादकीय देखने अथवा पढ़ने को मिला? नहीं मिलेगा, क्योंकि वामपंथी दबदबे वाले मीडिया संस्थानों के लिए भारत में संक्रमण की भयावह स्थिति एक अवसर के समान थी जब भारत की सरकार और विशेषकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जा सके और भारत की जनता में अविश्वास उत्पन्न किया जा सके। पश्चिमी मीडिया समूहों के साथ भारत के वामपंथी एवं मोदी विरोधी मीडिया समूहों ने भी अपना खूब रंग दिखाया था। किन्तु आज इन सभी ने चुप्पी साध ली है क्योंकि आज भारत, नए संक्रमण के मामले में पूरे पश्चिम जगत से कहीं बेहतर स्थिति में है।

हालाँकि भारतीय मीडिया संस्थानों की चुप्पी का एक प्रमुख कारण है केरल में संक्रमण की बदतर स्थिति। आज जब भारत में पिछले 24 घंटों में मात्र 7,579 संक्रमित मरीज सामने आए हैं वहीं अकेले केरल में ही इस समयावधि में संक्रमण के 3,698 नए मामले देखने को मिले। अब भारत का लिबरल और वामपंथी मीडिया संस्थान केरल की आलोचना तो करने से रहा क्योंकि यहाँ सत्ता में वामपंथी सरकार जो है। यह एक सत्य है कि वामपंथी कभी असफल होते ही नहीं। यदि भारत के कुल संक्रमण में से केरल का हिस्सा हटा दिया जाए तो शेष भारत में संक्रमण के मामले मात्र 3881 ही रह जाएंगे जो कि जॉर्डन, वियतनाम, मलेशिया और ऐसे ही न जाने कितने ही छोटे-छोटे देशों के संक्रमण के मामलों से भी कम है।

मृत्यु किसी भी देश में क्यों न हो, वह दुःखद होती है। मनुष्य की मृत्यु होती है तो साथ ही मरते हैं सैकड़ों स्वप्न और आशाएं। परिवार टूटते हैं, बिखरते हैं। किन्तु कहने का तात्पर्य यह नहीं है कि मीडिया पश्चिमी देशों में मरने वाले लोगों के छायाचित्र क्यों नहीं दिखा रहा अथवा क्यों ताबूतों में बंद शवों के छायाचित्रों को हजारों डॉलर में नहीं बेचा जा रहा। यह पूर्णतः अनुचित है किन्तु भारत में में हुई मौतों का उत्साह मनाना कब उचित था? क्या भारत में मात्र चिताएं ही जली थीं? क्या कब्रिस्तानों में शव नहीं दफनाए गए थे?

किन्तु जलती चिताएं दिखाकर हिंदुओं की मौतों का मजाक बनाया गया था। जलती चिताओं को दिखाकर भारत की सरकार (जो हिंदुवादी मानी जाती रही है) की असफलता का नैरेटिव पूरे विश्व में प्रचारित किया गया था। यह कार्य किया था पश्चिमी मीडिया और भारत के वामपंथी मीडिया ने जो आज सदमे में है। उसे यह सदमा लगा है Covid-19 संक्रमण को रोकने में एवं टीकाकरण कार्यक्रम में भारत द्वारा अपनाए जा रहे प्रयासों को देखकर। वामपंथी सदमे में इसलिए हैं क्योंकि लगातार चलाए गए दुष्प्रचार के पश्चात भी आज भारत अपनी वयस्क जनसंख्या का शत प्रतिशत टीकाकरण (कम से कम एक डोज) करने के लक्ष्य के बहुत निकट पहुँच चुका है। भारत के योग्य वैज्ञानिकों द्वारा निर्मित वैक्सीन को आज विश्व में स्वीकार किया जा रहा है एवं भारत ने न केवल अपने नागरिकों अपितु विश्व के अन्य देशों की सहायता भी की है।

आज पूरा विश्व संक्रमण से लड़ रहा है। सभी देश, संस्थाएं एवं वैज्ञानिक समुदाय जुटे हुए हैं संक्रमण का स्थायी, उचित एवं प्रभावी इलाज की खोज करने में किन्तु आपको यह स्मरण रहना चाहिए कि जब भारत इस संक्रमण के सबसे रौद्र रूप से युद्धरत था तब एक बड़े वर्ग ने भारत के प्रयासों को मलीन करने का प्रयास किया था। आपको इनका स्मरण रहना चाहिए। ये वही थे जिन्होंने खूब झूठी खबरें विस्तारित की, ये वही थे जिन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों एवं पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी की थी और सार्वजनिक स्थानों पर थूक कर संक्रमण बढ़ाने का प्रयास किया था। आपको स्मरण रहना चाहिए उन राजनेताओं का जिन्होंने सरकार का समर्थन करने के स्थान पर षड्यंत्र रचे जिससे केंद्र की सरकार असफल हो एवं जनता में उसके प्रति असंतोष उत्पन्न हो। साथ ही उन जनप्रतिनिधियों को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाना चाहिए जिन्होंने टीकाकरण कार्यक्रम के प्रारंभ में जनता के मन में असंतोष उत्पन्न करने का पूर्ण प्रयास किया था। आपको स्मरण रहेगा तो आप समय आने पर उसका प्रतिकार करेंगे।

सभी आँकड़े Worldometers से लिए गए हैं।