मुरैना का चौसठ योगिनी मंदिर

भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी जिससे है प्रेरित लुटियंस की संसद का डिजाइन : मुरैना का चौसठ योगिनी मंदिर

भारतवर्ष अनंत काल से धर्म, ज्ञान और विज्ञान परंपरा का सृजनकर्ता और पालनहार रहा है। सनातन के महत्वपूर्ण एवं अभिन्न अंगों के रूप में इनका विस्तार विश्व के दूसरे भागों में भी हुआ। इस विस्तार में भारत के धर्म केंद्रों का योगदान सर्वाधिक रहा क्योंकि इन धर्म स्थलों में आध्यात्म के साथ शैक्षणिक गतिविधियाँ भी अनवरत चलती रहीं। ऐसा ही एक सनातन धर्म केंद्र, चौसठ योगिनी मंदिर, मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित है जिसे भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी की पदवी प्रदान की गई। आज से लगभग 700 वर्ष पहले निर्मित इसी मंदिर की डिजाइन से प्रेरित होकर भारत की वर्तमान गोलाकार संसद का निर्माण हुआ। मंदिर के विषय में स्थानीय मान्यता है कि आज भी मंदिर में रात्रि को कोई नहीं रुक सकता, न तो मानव और न ही पशु-पक्षी।

गुर्जर राजा द्वारा स्थापित तंत्र साधना एवं शोध केंद्र :

मुरैना के पडावली के पास मितावली गाँव में स्थित चौसठ योगिनी मंदिर को एकट्टसो महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र में कई प्राचीन शिलालेख मिले जिनसे मंदिर निर्माण की जानकारी प्राप्त हुई। मंदिर का निर्माण सन् 1323 में गुर्जर राजा देवपाल द्वारा कराया गया। चौसठ योगिनी मंदिर एक देवस्थान होने के साथ शिक्षा का केंद्र भी था। यहाँ सूर्य के गोचर के आधार पर ज्योतिष और गणित में शिक्षा प्रदान की जाती थी। इसके अतिरिक्त यह स्थान तंत्र साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी था जहाँ न केवल भारत अपितु विश्व के कोने-कोने से साधक तंत्र साधना में निपुणता प्राप्त करने के लिए मुरैना आया करते थे। यही कारण है कि इस मंदिर को भारत की तांत्रिक यूनिवर्सिटी कहा गया।

64 योगिनियाँ, 1 शिवलिंग एवं गोलाकार संरचना :

भारत के गिने-चुने गोलाकार मंदिरों में से एक चौसठ योगिनी मंदिर में 64 कक्ष हैं जिनमें प्रत्येक कक्ष में एक योगिनी विराजमान हैं। प्रत्येक योगिनी के साथ एक शिवलिंग भी स्थापित है। मंदिर परिसर के ठीक मध्य में एक मंडप स्थित है जहाँ मुख्य शिवलिंग की स्थापना की गई है। स्थानीय निवासियों एवं मंदिर के विषय में जानकारी रखने वालों का मानना है कि यह मंदिर अभी भी शिव की तंत्र साधना के कवच ढका हुआ है।

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सभी चौसठ योगिनियाँ माता काली का अवतार मानी जाती हैं। इन चौसठ योगिनियों में 10 महाविद्याओं और सिद्ध विद्याओं की गिनती भी की जाती है। यहाँ स्थित सभी योगिनियाँ तंत्र और योग विद्या से सम्बंधित हैं, ऐसे में यहाँ आज भी योगिनियों को जागृत किया जाता है। मंदिर के विषय में सबसे रहस्यमयी बात यह है कि यहाँ रात्रि में रुकने की मनाही है। मंदिर परिसर में रात्रि के समय कोई भी मनुष्य, यहाँ तक कि पशु-पक्षी भी नहीं दिखाई देते हैं।

लुटियंस का बनाया संसद भवन चौसठ योगिनी मंदिर से प्रेरित :

मुरैना के चौसठ योगिनी मंदिर से प्रेरित होकर ही अंग्रेज वास्तुकार एडविन के. लुटियंस ने 1921-27 के दौरान भारतीय संसद का निर्माण करवाया था। हालाँकि यह तथ्य कहीं भी आधिकारिक तौर पर दर्ज नहीं किया गया है किन्तु मंदिर को देखकर ही यह ज्ञात हो जाता है कि संसद भवन की डिजाइन इसी मंदिर से प्रेरित थी। वैसे भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा को नष्ट करने की लालसा रखने वाले अंग्रेजों से यह आशा करना मूर्खता है कि वो यह स्वीकार करेंगे कि तत्कालीन भारत की सबसे महत्वपूर्ण इमारत का निर्माण उन्होंने एक मंदिर की डिजाइन से प्रेरित होकर किया था। किन्तु सत्य को कहीं दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती अपितु वह स्वयं प्रकाशित होता है।

चौसठ योगिनी मंदिर 101 स्तम्भों पर टिका हुआ है वहीं भारतीय संसद 144 स्तम्भों पर। दोनों ही गोलाकार आकृति के हैं। मंदिर में 64 कक्ष हैं जबकि संसद भवन में 340 कक्ष। दोनों में सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिस प्रकार चौसठ योगिनी मंदिर के केंद्र में एक विशाल मंडप है जहाँ भगवान शिव का शिवलिंग स्वरुप विराजमान है, उसी प्रकार संसद भवन के केंद्र में भी एक बड़ा सा हॉल निर्मित है।

मंदिर तक पहुँचने के साधन :

चौसठ योगिनी मंदिर, मुरैना के मितावली में स्थित है जो मुरैना एवं ग्वालियर से क्रमशः 25 किमी एवं 40 किमी की दूरी पर है। गोहद, मंदिर तक पहुँचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन है जो यहाँ से लगभगफ 18 किमी की दूरी पर है। इसके अतिरिक्त चौसठ योगिनी मंदिर से निकटतम हवाईअड्डा ग्वालियर में स्थित है जो यहाँ लगभग 28 किमी की दूरी पर है। ग्वालियर अथवा मुरैना से मंदिर तक पहुँचने के लिए सभी प्रकार के यातायात के साधन उपलब्ध रहते हैं।

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