उज्जैन का चिंतामण गणेश मंदिर

चिंतामण गणेश मंदिर : उज्जैन के पुरातन मंदिरों में एक जिसकी स्थापना की थी प्रभु श्री राम एवं माता सीता ने

गजानन, गणपति, विघ्नहर्ता, लम्बोदर, शूर्पकर्ण, सिद्धेश और ऐसे ही कई नामों से भक्तों में विख्यात भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं। भारतवर्ष के कोने-कोने में भगवान गणेश के कई ऐसे मंदिर स्थित हैं जो सदियों पुराने हैं और अपने साथ एक महान इतिहास समेटे हुए हैं। महाकाल की नगरी कहे जाने वाले उज्जैन (प्राचीन नाम अवंतिका) में भी भगवान गणेश का एक ऐसा पुरातन मंदिर है जो भगवान राम से जुड़ा हुआ है और इस मंदिर की स्थापना भी माता सीता और प्रभु श्री राम ने ही की थी। तभी से भगवान गणेश अपने द्वार पर आने वाले प्रत्येक भक्त की चिंताओं और दुःखों का हरण करते आ रहे हैं और यही कारण है कि रामायणकालीन यह देवस्थान चिंतामण गणेश मंदिर के नाम से जाना जाता है।

रामायण काल में निर्मित, माता अहिल्याबाई होल्कर द्वारा जीर्णोद्धार :

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से लगभग 6 किलोमीटर (किमी) की दूरी पर स्थित चिंतामण गणेश मंदिर माता सीता द्वारा स्थापित षट् विनायकों में से एक हैं। अपने वनवास के समय जब प्रभु श्री राम, माता सीता और अनुज लक्ष्मण के साथ वनों में भ्रमण कर रहे थे तब माता सीता ने अपने संकल्प की पूर्ति के लिए भगवान गणेश को समर्पित दिव्य स्थानों की स्थापना की। चिंतामण गणेश भी उनमें से एक हैं। यहाँ एक बावड़ी भी है जिसकी गहराई लगभग 80 फुट है। इसे लक्ष्मण बावड़ी कहा जाता है क्योंकि इसका निर्माण लक्ष्मण जी ने अपने बाण से किया था।

वर्तमान दृश्य मंदिर मालवा क्षेत्र में शासन करने वाले परमार वंश के राजाओं द्वारा निर्मित किया गया था। मंदिर का वर्तमान स्वरूप लगभग 10वीं से 12वीं शताब्दी का है। इंदौर की महारानी माता अहिल्याबाई होल्कर द्वारा चिंतामण गणेश मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया और इसी समय मंदिर में जलकुंड और बाउंड्री वॉल का निर्माण भी हुआ।

मंदिर की संरचना, स्वयंभू विग्रह एवं प्रमुख त्यौहार :

पत्थरों से निर्मित चिंतामण गणेश मंदिर का सभा मंडप परमारकालीन ही है। मंडप के स्तंभों पर सुंदर नक्काशी देखी जा सकती है। मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन गर्भगृह से ही किए जा सकते हैं लेकिन गर्भगृह का द्वार बहुत छोटा है और भगवान गणेश के दर्शन करने के लिए भक्तों को नीचे झुक कर जाना होता है।

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गर्भगृह में स्थापित भगवान गणेश का विग्रह (प्रतिमा) स्वयंभू है और गर्भगृह में उनके चिंतामण स्वरूप के अतिरिक्त दो और विग्रह स्थापित हैं, इच्छामन और सिद्धिविनायक। भगवान गणेश के अतिरिक्त भगवान विष्णु भी मंदिर में विराजमान हैं और यह एक ऐसा अनूठा मंदिर है जहाँ भगवान गणेश के साथ भगवान विष्णु की आराधना भी की जाती है।

वर्ष के बारह महीने श्रद्धालुओं की भीड़ से भरे रहने वाले चिंतामण गणेश मंदिर में प्रत्येक बुधवार को भक्तों की संख्या बढ़ जाती है, साथ ही चैत्र मास के बुधवार का महत्व उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर में कहीं अधिक माना गया है। प्रमुख हिन्दू त्यौहारों पर तो यहाँ भक्तों का मेला उमड़ पड़ता है। गणेश चतुर्थी एवं तिल चतुर्थी यहाँ के प्रमुख त्यौहार हैं।

मंदिर तक पहुँचने के साधन :

उज्जैन, मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में से एक है और यही कारण है कि यहाँ तक पहुँचने के लिए यातायात के सभी साधन सरलता से उपलब्ध हैं। चिंतामण गणेश मंदिर तक पहुँचने के लिए निकटतम हवाईअड्डा इंदौर में स्थित है। देवी अहिल्याबाई होल्कर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से मंदिर की दूरी लगभग 60 किमी है। उज्जैन, रेलमार्ग से भी भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। उज्जैन जंक्शन से चिंतामण गणेश मंदिर की दूरी लगभग 7 किमी है। इसके अतिरिक्त सड़क मार्ग से भी भारत के किसी भी कोने से उज्जैन पहुँचना बहुत सरल है।