Hindutva Yatra

हिंदुत्व यात्रा भाग 4 : भारत की एक राष्ट्र के रूप में परिकल्पना में हिंदुत्व का महत्व।

आज जबकि सम्पूर्ण विश्व किसी न किसी रूप में आतंरिक द्वंदों से जूझ रहा है भारत में एक धार्मिक और राष्ट्रीय पुनर्जागरण हो रहा है। भारत के जन जन में किसी न किसी रूप में हिंदुत्व का भाव प्रबल हो रहा है।

राग भारत के पहले ही लेख में बताया गया है कि एक देश और राष्ट्र में क्या अंतर है। भारत की परिकल्पना एक राष्ट्र के रूप में की जाती है। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली समझता हूँ जो मेरा जन्म इस भारत भूमि में हुआ। भारतवर्ष से महान इस विश्व में कोई भी नहीं है। इसकी सांस्कृतिक और सनातन पहचान अद्वितीय है। आज जबकि सम्पूर्ण विश्व किसी न किसी रूप में आतंरिक द्वंदों से जूझ रहा है भारत में एक धार्मिक और राष्ट्रीय पुनर्जागरण हो रहा है। ऐसा नहीं है कि भारत पूर्णतः शांत और व्यवस्थित बना हुआ है। भारत एक साथ कई मोर्चों पर युद्धरत है। एक ओर कोरोना वायरस का संकट है दूसरी ओर अर्थव्यवस्था को बनाए रखने का। एक ओर कोने कोने में छुपे हुए आतंरिक शत्रु हैं तो दूसरी ओर पाकिस्तान और चीन जैसे उद्दंड पडोसी देश। भारत को नुकसान तो झेलना पड़ रहा है किन्तु इन सब घटनाओं का एक सकारात्मक पहलू यह है कि भारतवासी जो आज तक सुसुप्त अवस्था में थे, आज वो जागृत हो रहे हैं। भारतवासी अपने राष्ट्र का निर्माण करना सीख रहे हैं। आत्मनिर्भरता के मार्ग पर चल पड़े हैं। आज भारतवर्ष के सांस्कृतिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त हो रहा है क्योंकि लोगों ने निष्पक्षता का त्याग कर अपने पक्ष को सुदृढ़ सीखा है। भारत के जन जन में किसी न किसी रूप में हिंदुत्व का भाव प्रबल हो रहा है।

हिंदुत्व यात्रा के इस लेख का उद्देश्य है, भारत की एक राष्ट्र के रूप में परिकल्पना में हिंदुत्व के महत्व का अध्ययन करना।

हिंदुत्व एक साझी पहचान है इस भारत में निवास करने वाले लोगों की। उत्तर में हिमालय से दक्षिण में हिन्द महासागर तक एवं पूर्व में अरुणाचल से पश्चिम में गुजरात तक जो एकीकृत भूमि है, वहाँ निवास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है। इस हिन्दू का जो सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी भाव है वही हिंदुत्व है। किसी वामपंथी या कांग्रेसी के कहने मात्र से हिंदुत्व का भाव क्षीण नहीं हो जाता है। हिंदुत्व के अनुयायियों ने सदैव ही भारत के एकीकरण का स्वप्न देखा। स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर ने राष्ट्र के उत्थान में हिंदुत्व महत्व को भली प्रकार से समझाया है। जिस राष्ट्र में इतनी विविधता हो कि एक जिले से दूसरे जिले में चले जाने से बोलियां बदल जाएं, पकवान बदल जाएं, उस राष्ट्र के एकीकरण का कारक कोई सूक्ष्म विचार नहीं हो सकता है। भारतवर्ष के एकीकरण के लिए मंच है हिंदुत्व। हिंदुत्व भगवान श्री राम के उस राम राज्य की परिकल्पना पर आधारित है जो अपने निजी कल्याण अथवा राज्य कल्याण की संकीर्ण विचारधारा के ताने बाने में उलझा हुआ नहीं है अपितु सकल पृथ्वी के कल्याण की बात करता है। हिंदुत्व श्री कृष्ण के उस व्यवहारिक समाजशास्त्र का सारांश है जो धर्म स्थापना के लिए आवश्यक है। हिंदुत्व एक ऐसी विचारधारा है जो राष्ट्रीय उत्थान के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर देने का साहस प्रदान करती है। एक राष्ट्र क्या चाहता है अपने नागरिकों से? किसी भी राष्ट्र की महानता कैसे सुदृढ़ बनी रह सकती है? यह सब संभव होता है जब राष्ट्र के नागरिकों में अपनी सभ्यता और संस्कृति के प्रति साझा गर्व का भाव होता है। भारतवर्ष में यही गर्व का भाव है हिंदुत्व। हिंदुत्व, सनातन के साथ राष्ट्रवाद का एक अनूठा संयोजन है। क्या हम सनातन के बिना भारतवर्ष की कल्पना कर सकते हैं? क्या भारतवर्ष को हिन्दू धर्म से अलग परिभाषित कर सकते हैं? यह संभव नहीं है क्योंकि भारतवर्ष महान है इसलिए की यह सनातन धर्म की भूमि रहा है। राष्ट्रवाद का अस्तित्व आज से नहीं अपितु युगों युगों से है। प्रत्येक युग में राष्ट्रवाद का विचार विभिन्न अर्थों वाला रहा किन्तु राष्ट्रवाद का सार एक ही बना रहा। हिंदुत्व उसी धार्मिक राष्ट्रवाद का प्रेरणा स्त्रोत है।

हम एक महान राष्ट्र भारतवर्ष की परिकल्पना करते हैं जहाँ कोई भी व्यक्ति अपने आप को तमिल, कन्नड़, तेलुगु, पंजाबी, बंगाली और गुजराती मानने के स्थान पर भारतीय माने और एक राष्ट्रीय ईकाई की भांति व्यवहार करे। प्रादेशिक पहचान आवश्यक है किन्तु उससे भी ऊपर है राष्ट्रीय पहचान। भारत राष्ट्र के एकीकरण का एकमात्र उपकरण है हिंदुत्व। हिन्दू होने का भाव ही है हिंदुत्व। सैकड़ों वर्षों से भारत ही नहीं विश्व के अलग अलग हिस्सों में हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार हुआ। भारतवर्ष के महान शासकों ने दक्षिण पूर्वी एशिया तक हिन्दू साम्राज्य का विस्तार किया। आज भी दक्षिण पूर्वी एशिया के देशों में स्थित हिन्दू मंदिर वहॉं सनातन की उपस्थिति की गाथा कहते हैं। यह विस्तार राजनैतिक नहीं अपितु सांस्कृतिक भी था। काशी-कश्मीर, कर्णावती-कामाख्या, भुवनेश्वर-ब्रह्मदेश, मद्रास-कम्बोडिया सभी सनातन धर्म के अस्तित्व से जुड़े हुए थे। राज्यों के नाम और शासक अलग हो जाने से जम्बूद्वीप के विखंडन का सिद्धांत स्वीकार्य नहीं हो जाता। भारतवर्ष एक ईकाई के रूप में इतिहास में भी अस्तित्व में था और आज भी है। आज के बुद्धिजीवी इस सनातन विचार को Hinduism कहते हैं और इसका उपयोग हिंदुत्व को नकारने के लिए करते हैं। Hinduism और हिंदुत्व के बीच के अंतर को भी हिंदुत्व यात्रा के पिछले लेख में बताया गया है। एक पश्चिमी विचार का उपयोग करके हिंदुत्व को नष्ट नहीं किया जा सकता है। हिंदुत्व शब्द भले ही आधुनिक इतिहास की देन है किन्तु हिंदुत्व का विचार अनंत काल से अस्तित्व में है।

वामपंथी इतिहासकार और बुद्धिजीवी भले ही हिंदुत्व को गालियां दें और उसके अनुयायियों को कट्टरपंथी कहें किन्तु सत्य यही है कि हिंदुत्व अब अमर हो चुका है। भारत राष्ट्र की संकल्पना हिंदुत्व के बिना अपूर्ण है। आज नहीं तो आगामी भविष्य में हिंदुत्व अपनी ख्याति पुनः प्राप्त करेगा।

अब यह हम हिन्दुओं का कर्त्तव्य भी है कि हम अपने राष्ट्र निर्माण में सहायक बनें। इसके लिए आवश्यक है अपने धर्म केप्रति अटल होना। हिंदुत्व वही अटल विचार है। हिंदुत्व का प्रचार प्रसार करना और उसके प्रति राष्ट्र विरोधियों की घृणा का नाश करना हमारा दायित्व है। यदि हम हिंदुत्ववादी हैं तो इसका तात्पर्य यह नहीं है कि हम कट्टरवादी हैं, हम हठी हैं। हिंदुत्ववादी होने का अर्थ है अपने धर्म और राष्ट्र के प्रति पूरी तरह से समर्पित होना। हम हिंदुत्ववादी हैं क्योंकि हम श्री राम के वंशज हैं जो धर्म की मर्यादा में भी रहना जानते हैं और धर्म रक्षा के लिए शस्त्र उठाना भी। हम हिंदुत्ववादी हैं क्योंकि हमारा अस्तित्व हमारे राष्ट्र के प्रति समर्पित है। हमारे कर्म माँ भारती के चरणों में अर्पित हैं।

इसलिए हे हिन्दुओं ! हिंदुत्ववादी बनो और हिंदुत्व पर गर्व करो। आर्थिक रूप से संपन्न बनो, सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ बनो, अपने धर्म का पालन करो। राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए जो बन पड़े करो।

धर्म और राष्ट्र ही अंतिम सत्य हैं। अपना कर्म इन्हे ही समर्पित करो। महान भारतवर्ष के निर्माण में भागीदार बनो।

हिंदुत्व यात्रा के अगले भाग में हम हिंदुत्व और वीर सावरकर के संबंधों पर चिंतन करेंगे। अगला लेख एक फैक्ट चेक की भांति होगा जिसमें वीर सावरकर के हिंदुत्व विचार के विषय में फैलाई गई भ्रांतियों का खंडन किया जाएगा।
जय श्री राम।।

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