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हनुमान जी की न्यायिक व्यवस्था। भारतवर्ष का वो स्थान जहाँ लगती है हनुमान जी की न्यायालय।

हनुमान जी की न्यायिक व्यवस्था। भारतवर्ष का वो स्थान जहाँ लगती है हनुमान जी की न्यायालय।

जब भी श्री हनुमान जी का नाम आता है तो हमारे सामने छवि उभर आती है एक भक्त की। एक ऐसा भक्त जिसने अपना जीवन प्रभु श्री राम की सेवा में लगाया। एक ऐसा भक्त जिसने भक्ति की परिभाषा बदल दी और प्रभु सेवा के अद्भुत आयाम रच दिए। हनुमान जी तो ऐसे भक्त हैं जो पूरी लंका नष्ट करके आते हैं और प्रभु श्रीराम से कहते हैं कि मैंने तो कुछ किया ही नहीं सब आपकी कृपा से हुआ है। भगवान् का नाम उनसे पहले लिया जाए इसलिए कहते हैं कि जो व्यक्ति सुबह उठते ही मेरा नाम लेगा उसे उस दिन आहार नहीं मिलेगा। बजरंगबली की इसी विनम्रता और सेवा भाव को देखते हुए राजा रामचंद्र जी ने उन्हें अनन्त काल तक भारतवर्ष का कल्याण करते रहने का दायित्व सौंपा।

अपने राजा के द्वारा दिए गए इसी दायित्व को पूरा करते हुए हनुमान जी कलियुग में भी अपने भक्तों और सज्जन व्यक्तिओं का कल्याण करते हैं। भारतवर्ष में केसरी नंदन के कई मंदिर हैं जो अनूठे हैं और जिनकी विशेषताएँ उन्हें पूरे विश्व में उपस्थित उनके भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाती हैं। हनुमान जी के ऐसे ही तीन मंदिर मध्यप्रदेश के रीवा जिले में हैं जिनका निर्माण हनुमान जी की त्रिस्तरीय न्यायिक व्यवस्था के रूप में हुआ है। तो चलिए ले चलते हैं आपको रीवा जो सफ़ेद बाघों की नगरी कही जाती है।

रीवा रेलवे स्टेशन से लगभग 8 किमी की दूरी पर रीवा-गुढ़-सीधी मार्ग पर चिरहुला नाथ स्वामी का मंदिर है। चिरहुला नाथ स्वामी रीवा के राजा कहे जाते हैं । लगभग पांच सौ वर्ष पहले यहाँ हनुमान जी की स्थापना चिरौल दास बाबा ने की थी जिनके नाम से इस मंदिर का नाम चिरहुला नाथ पड़ा। हनुमान जी की न्यायिक व्यवस्था का पहला स्तर अर्थात जिला न्यायालय यही मंदिर है। रीवा में कोई भी नया वाहन ख़रीदे, नया व्यवसाय आरम्भ करे अथवा जीवन में कुछ भी नया प्रारम्भ करे चिरहुला नाथ स्वामी के दर्शन करने एवं उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए अवश्य जाता है। जिला न्यायालय होने के कारण यहाँ भक्तों की अधिक भीड़ उमड़ती है क्योंकि कोई भी कष्ट हो पहले आवेदन निचली अदालत में ही दिया जाता है। सामान्यतः यहाँ से लोगों के कष्ट दूर होते हैं किन्तु यदि ऐसा नहीं होता है तो लोग उच्च न्यायालय अर्थात हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं।

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चिरहुला नाथ स्वामी

रीवा जिले का उच्च न्यायालय, निचली अदालत अर्थात चिरहुला नाथ स्वामी मंदिर से 2 किमी की दूरी पर स्थित है। इस उच्च न्यायालय को रामसागर हाई कोर्ट दरबार कहा जाता है। रामसागर दरबार, रामसागर तालाब की मेढ़ पर स्थित है। यहाँ चिरहुला नाथ स्वामी मंदिर से थोड़ी कम भीड़ होती है किन्तु रामनवमी और हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर भक्त सुबह से सायं काल तक यहाँ आते रहते हैं।

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रामसागर हाई कोर्ट दरबार

अब उच्चतम न्यायालय अर्थात खेमसागर हनुमान मंदिर पहुँचने के लिए हमें मुख्य रोड पर चिरहुला नाथ स्वामी मंदिर के आगे लगभग 5 किमी जाना होगा। वहां हमें खेमसागर तालाब की मेढ़ पर बने मंदिर में सुप्रीम कोर्ट दरबार के मुखिया हनुमान जी के दर्शन होंगे। यहाँ सबसे कम भीड़ होती है किन्तु यह स्थान सबसे सिद्ध है क्योंकि यहाँ की ऊर्जा शक्ति और सामर्थ्य विशेष है। यहाँ आने के बाद भक्तों के कष्ट पूरी तरह से दूर हो जाते हैं और समस्याओं से पार पाने के लिए नए मार्ग प्राप्त होते हैं।

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खेमसागर हनुमान जी 

इन मंदिरों की विशेषता यह है कि तीनों ही मंदिर एक ही दिशा में बने हैं और तालाब के किनारे पर स्थित हैं। इन मंदिरों में न केवल रीवा के अपितु आस पास के अन्य जिलों के लोगों की प्रबल आस्था है। हनुमान जी हैं ही ऐसे। उनके भक्त कहीं भी हो लेकिन अपने प्रभु को अवश्य ढूंढ लेते हैं।

अगर आप रीवा के रहने वाले हैं और अभी तक इन स्थानों के दर्शन नहीं किये हैं तो अवश्य जाएं। यदि आप रीवा के बाहर रहते हैं और कभी भी जबलपुर से प्रयागराज और काशी जाते समय रीवा से गुजरें तो इन तीनों ही मंदिरों में थोड़ा समय अवश्य दें। निश्चित ही आपको मन की शांति के साथ ऊर्जा की प्राप्ति भी होगी।

जय श्री राम।।                    

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